Aacharan News
उज्जैन• 1 day ago Breaking

पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की 'सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा' का दूसरा दिन: उज्जैन में चंदा चोरी और वोट चोरी के खिलाफ मुखर हुए कांग्रेस नेता, कहा- बैलेट पेपर से हो चुनाव और दोषियों को भेजा

21 October 2026 • 08:39 am

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह द्वारा उज्जैन से अयोध्या तक निकाली जा रही बहुचर्चित 'सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा' का बुधवार को दूसरा दिन है। सुबह करीब दस बजे तराना रोड स्थित श्री साईं कुंज कॉलोनी से इस भव्य पदयात्रा की शुरुआत हुई, जिसमें दिग्विजय सिंह अपने सैंकड़ों समर्थकों और श्रद्धालुओं के साथ पैदल मार्च करते हुए आगे बढ़ रहे हैं। यात्रा के दौरान उनके हाथ में पारंपरिक डंडा नजर आया, जिसके जरिए उन्होंने देश और प्रदेश की राजनीति में चंदा चोरी, वोट चोरी और सनातन धर्म के नाम पर हो रही कथित गड़बड़ियों के खिलाफ तीखे तेवर दिखाए।

चंदा चोरी और वोट चोरी पर कड़ा प्रहार, बैलेट पेपर की मांग

यात्रा के दौरान मीडिया और आम जनता को संबोधित करते हुए दिग्विजय सिंह ने भ्रष्टाचार और चुनावी प्रणाली पर खुलकर सवाल उठाए। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि चंदा चोरी करने वालों को बख्शा नहीं जाना चाहिए, उन्हें तुरंत पकड़ा जाना चाहिए और जेल भेजा जाना चाहिए, उनका बचाव करने की कोई जरूरत नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने देश में वोट चोरी और नोट चोरी के गंभीर मुद्दों को उठाते हुए मांग की कि अब ईवीएम से चुनाव बंद होने चाहिए और देश में पूरी तरह से बैलेट पेपर के माध्यम से ही चुनाव कराए जाने चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य किसी के खिलाफ राजनीतिक या चुनावी इस्तेमाल करना बिल्कुल नहीं है, बल्कि आम जनता के सामने सच रखना और न्याय की मांग करना है।

950 किलोमीटर का लंबा सफर और तय रूट

यह संपूर्ण यात्रा लगभग 950 किलोमीटर लंबी है, जो करीब 70 दिनों में पूरी होकर उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्थित पावन राम मंदिर पहुंचेगी। यात्रा के दूसरे दिन का शेड्यूल पिंग्लेश्वर जोड़, नहारिया जोड़, सायराखेड़ी और देवनखेड़ी होते हुए तराना रोड स्थित ताजपुर जोड़ तक पहुंचने का था। यहाँ दोपहर के वक्त भोजन और विश्राम के बाद यात्रा ने आगे का रुख किया और शाम को देवास जिले के सिंदूरिया गांव में इसका रात्रि पड़ाव प्रस्तावित किया गया है। यात्रा के साथ एक विशेष रूप से सजाया गया रथ भी चल रहा है, जिस पर 'सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा' का बोर्ड लगा हुआ है।

शिव धाम से राम धाम की यात्रा और तीखी प्रतिक्रियाएं

दैनिक भास्कर से विशेष चर्चा के दौरान दिग्विजय सिंह ने इस पूरी पदयात्रा को 'शिव धाम से राम धाम की यात्रा' करार दिया। यात्रा के दौरान उन्होंने अपने समर्थकों के साथ 'बम-बम भोले' का गगनभेदी उद्घोष किया, जिसके जवाब में समर्थकों ने 'जय सियाराम' के नारे लगाए। इस दौरान उन्होंने कहा कि हमारी सनातन परंपरा कभी भी सीता जी का अपमान या किसी भी नारी का अनादर करना नहीं सिखाती।

दूसरी ओर, मॉडल से साध्वी बनीं हर्षा रिछारिया उर्फ हर्षानंद गिरि द्वारा इस यात्रा पर तंज कसते हुए यह टिप्पणी की गई थी कि जब राम मंदिर बन रहा था, तब ऐसा उत्साह नहीं दिखा जैसा अब मंदिर के चंदे पर सवाल उठाने में दिखाई दे रहा है। जब पत्रकारों ने इस पर दिग्विजय सिंह से प्रतिक्रिया मांगी, तो उन्होंने बेहद बेपरवाह अंदाज में जवाब देते हुए कहा कि "उनको छोड़ दीजिए, मैं तो उन्हें जानता भी नहीं हूँ।"

अमृता राय बोलीं- यह हर धर्म के व्यक्ति के स्वाभिमान को जगाने वाली यात्रा है

दिग्गज नेता की पत्नी अमृता राय ने भी इस यात्रा में पूरी सक्रियता के साथ हिस्सा लिया और कहा कि यह केवल एक राजनीतिक यात्रा नहीं, बल्कि हर धर्म के नागरिक के स्वाभिमान को झकझोर कर जगाने वाली वैचारिक यात्रा है। उनके मुताबिक, चढ़ावा चोरी और धर्म के नाम पर की जा रही धोखेबाजी ने सनातन धर्म को मानने वाले करोड़ों लोगों के स्वाभिमान को गहरी ठेस पहुंचाई है, और इसी ज्वलंत मुद्दे को उठाने के लिए यह पदयात्रा निकाली जा रही है। उन्होंने यह भी घोषणा की कि दिग्विजय सिंह की अनुपस्थिति में यात्रा से जुड़े संवाद और प्रबंधन की जिम्मेदारी वह खुद संभालेंगी, और उन्हें इस यात्रा का आधिकारिक प्रवक्ता तथा उनकी अनुपस्थिति में योगेंद्र परिहार को सह-प्रवक्ता नियुक्त किया गया है।

हजारों का पंजीकरण और सिर्फ छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई का आरोप

यात्रा के संयोजक चंदर सिंह सोंधिया ने जानकारी दी कि इस पदयात्रा में स्थाई रूप से लगातार साथ चलने के लिए अब तक करीब तीन हजार से अधिक लोगों ने आधिकारिक रूप से अपना रजिस्ट्रेशन कराया है, जबकि इसके अलावा हजारों की संख्या में स्थानीय लोग अलग-अलग पड़ावों पर स्वतः इस यात्रा से जुड़ते जा रहे हैं। यात्रा की शुरुआत में ही दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया था कि सनातन धर्म के नाम पर राजनीति करने और चंदा जुटाने में जो बड़ी गड़बड़ियां सामने आई हैं, उनमें केवल छोटे-मोटे कर्मचारियों पर खानापूर्ति की कार्रवाई की गई है, जबकि बड़े अधिकारियों और मुख्य सरगनाओं की जवाबदेही तय नहीं की गई है। इस यात्रा के माध्यम से पर्चे बांटकर राष्ट्रपति के नाम एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपने की भी तैयारी की जा रही है।