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मध्यप्रदेश • 1 day ago Breaking

जबलपुर नगर निगम आयुक्त रामप्रकाश अहिरवार के तबादले पर गरमाई सियासत: भाजपा विधायक अजय विश्नोई की 'भगवान श्रीराम' से जुड़ी टिप्पणी पर भड़की कांग्रेस, विवाद बढ़ने पर हटानी पड़ी पोस्ट

21 October 2026 • 07:23 am

मध्य प्रदेश की संस्कारधानी जबलपुर में नगर निगम आयुक्त रामप्रकाश अहिरवार के अचानक हुए तबादले ने प्रशासनिक गलियारों से निकलकर अब एक बड़े सियासी विवाद का रूप ले लिया है। इस पूरे घटनाक्रम ने उस वक्त राजनीतिक तूल पकड़ लिया, जब जिले की पाटन विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ और मुखर विधायक अजय विश्नोई ने इस तबादले को लेकर सोशल मीडिया पर एक ऐसी पोस्ट साझा कर दी, जिसने देखते ही देखते शहर से लेकर प्रदेश की राजनीति में हलचल मचा दी। हालांकि, चारों तरफ से बढ़ते विवाद और तीखी प्रतिक्रियाओं के बाद विधायक ने अपनी इस पोस्ट को सोशल मीडिया से हटा लिया, लेकिन तब तक यह मुद्दा सियासी गलियारों में चर्चा का प्रमुख केंद्र बन चुका था।

भगवान श्रीराम से तुलना पर कांग्रेस ने जताई कड़ी आपत्ति

दरअसल, यह पूरा विवाद विधायक अजय विश्नोई की उस टिप्पणी से शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने निगम आयुक्त रामप्रकाश अहिरवार के जबलपुर से हुए तबादले को सीधे तौर पर आराध्य भगवान श्रीराम के संदर्भ से जोड़ते हुए अपनी बात रखी थी। भाजपा विधायक की यह पोस्ट जैसे ही सार्वजनिक हुई, विपक्षी दल कांग्रेस ने इसे तुरंत लपक लिया और इस पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। कांग्रेस के नेताओं ने भाजपा और विधायक विश्नोई को घेरते हुए यह गंभीर सवाल खड़ा किया कि आखिर एक सामान्य प्रशासनिक अधिकारी की तुलना मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम से कैसे और क्यों की जा सकती है? कांग्रेस ने इसे धार्मिक भावनाओं और मर्यादा के विपरीत बताते हुए भाजपा से जवाब मांगा, जिसके बाद मामला काफी गरमा गया और अंततः विधायक को अपनी पोस्ट हटानी पड़ी।

तारीफ, नाराजगी या सियासी तंज? विधायक की मंशा पर उठे सवाल

पोस्ट हटने के बावजूद जबलपुर के राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में यह बड़ा सवाल लगातार तैर रहा है कि आखिर निवर्तमान आयुक्त रामप्रकाश अहिरवार के जबलपुर कार्यकाल में ऐसा क्या खास रहा, जिसके चलते उनके स्थानांतरण पर सत्तापक्ष के ही एक वरिष्ठ विधायक को इस तरह की टिप्पणी करने के लिए मजबूर होना पड़ा? राजनीतिक विश्लेषक और आम नागरिक इस बात के कयास लगा रहे हैं कि क्या यह पोस्ट वास्तव में अधिकारी के उत्कृष्ट कामकाज की तारीफ में लिखी गई थी, या फिर अचानक हुए इस तबादले के फैसले पर विधायक की कोई अंदरूनी नाराजगी थी? इसके अलावा, इस बात की भी चर्चा जोरों पर है कि क्या इस टिप्पणी के पीछे कोई गहरा राजनीतिक कटाक्ष अथवा प्रशासनिक खींचतान छिपी हुई थी। फिलहाल, इन तमाम सुलगते सवालों के बीच इस टिप्पणी की वास्तविक वजह अभी तक पूरी तरह से स्पष्ट नहीं हो सकी है।

सागर नगर निगम में भी बेहद चर्चित रहा है अहिरवार का कार्यकाल

उल्लेखनीय है कि भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी रामप्रकाश अहिरवार अपनी तेजतर्रार कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं और जबलपुर से पहले वे सागर नगर निगम के आयुक्त के पद पर भी अपनी महत्वपूर्ण सेवाएं दे चुके हैं। सागर में उनके कार्यकाल के दौरान भी नगर निगम के भीतर उनकी बेहद मजबूत प्रशासनिक पकड़ और सख्त फैसलों की खूब चर्चा रही थी। उस दौर में सागर में जब महापौर से जुड़े विभिन्न राजनीतिक विवाद सामने आए थे, तब उन चुनौतियों के बीच भी नगर निगम की कार्यप्रणाली और अहिरवार की भूमिका सुर्खियों में बनी रही थी। विशेष रूप से तब, जब सागर शहर में स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत बड़े पैमाने पर विकास और निर्माण कार्य तेजी से संचालित किए जा रहे थे।

स्पष्टीकरण का इंतजार और सियासी बयानबाजी तेज

फिलहाल, भाजपा विधायक अजय विश्नोई की इस एक सोशल मीडिया पोस्ट ने जबलपुर से लेकर भोपाल तक एक नई राजनीतिक बहस को जन्म दे दिया है। पोस्ट हटाए जाने के बाद भी विपक्ष इस मुद्दे को छोड़ने के मूड में नजर नहीं आ रहा है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हुई हैं कि आखिर इस बहुचर्चित टिप्पणी के पीछे की असली मंशा क्या थी और क्या आने वाले दिनों में स्वयं विधायक अजय विश्नोई की ओर से इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण या नया बयान सामने आता है या नहीं।