Aacharan News
सागर• 1 day ago Breaking

सागर में आस्था और परंपरा का अद्भुत सैलाब: 'कांधे वाली काली' को विदाई देने उमड़ा पूरा शहर, जलती मशाल और 'चल माई-चल माई' के जयकारों के बीच तीनबत्ती पर हुई भव्य आतिशबाजी

21 October 2026 • 08:23 am

मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक शहर सागर में विजयादशमी के पावन पर्व पर भक्ति, आस्था और प्राचीन परंपराओं का एक ऐसा विहंगम दृश्य देखने को मिला, जिसने हर किसी को मंत्रमुग्ध कर दिया। शहर के विभिन्न पंडालों में नौ दिनों तक विराजित रहीं मां भगवती की प्रतिमाओं को नम आंखों और भारी उत्साह के साथ ढोल-नगाड़ों के बीच विदाई दी गई। शहर के अलग-अलग हिस्सों से भव्य दुर्गा विसर्जन चल समारोह निकाले गए, जिससे तीनबत्ती से लेकर राधा टॉकीज तक का पूरा इलाका श्रद्धालुओं की भीड़ से खचाखच भर गया। आकर्षक साज-सज्जा से सजी मां दुर्गा की झांकियों के साथ पूरे शहर में भक्ति का एक विशाल सैलाब उमड़ पड़ा।

जलती मशाल और कंधों पर सवार मां की प्रतिमा का अलौकिक दृश्य

चल समारोह के मार्ग पर सड़क के दोनों ओर हजारों की संख्या में लोग अपनी पलकें बिछाए खड़े रहे। इस दौरान शहर की सबसे प्रसिद्ध, प्राचीन और गौरवशाली 'पुरव्याऊ की कांधे वाली काली' माता का चल समारोह आकर्षण का मुख्य केंद्र रहा। पुरव्याऊ क्षेत्र से जब भक्त माता की पावन प्रतिमा को अपने कंधों पर उठाकर विसर्जन के लिए निकले, तो पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।

इस भव्य चल समारोह की सबसे अनूठी विशेषता यह थी कि इसके सबसे आगे एक प्रज्वलित मशाल (पलीता) चल रही थी, जिसकी रोशनी में सैकड़ों युवा सड़क पर दौड़ते हुए आगे बढ़ रहे थे, और उनके ठीक पीछे भक्तों के कंधों पर सवार मां दुर्गा की दिव्य प्रतिमा चल रही थी। इस दुर्लभ और अलौकिक दृश्य को अपनी आंखों में बसाने के लिए मार्ग के दोनों ओर हजारों लोग मौजूद रहे, जो लगातार मोबाइल कैमरों से इस पल को कैद करते नजर आए। समूचा मार्ग 'चल माई, चल माई' के गगनभेदी जयकारों से गूंज उठा और भक्तों ने जगह-जगह पुष्पवर्षा कर मां को अपनी अश्रुपूर्ण विदाई दी।

तीनबत्ती पर आतिशबाजी और कटरा बाजार में महाप्रसादी का वितरण

जैसे ही पुरव्याऊ वाली माता का यह विशाल चल समारोह देर रात तीनबत्ती तिराहे पर पहुंचा, वहाँ का नजारा देखते ही बनता था। जलती हुई मशाल, सड़क पर दौड़ते उत्साही युवा और चारों तरफ गूंजते माता के जयकारों के बीच जैसे ही प्रतिमा तिराहे पर पहुंची, श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर उसका भव्य स्वागत किया और इस दौरान आसमान को रोशन करती हुई जबरदस्त आतिशबाजी की गई।

इसके बाद चल समारोह कटरा बाजार की ओर बढ़ा, जहां मार्ग पर माता के स्वागत के लिए विशेष टेंट लगाए गए थे। कटरा बाजार मार्ग पर डीजे की धुनों और भक्ति गीतों की गूंज पर युवा झूमते हुए नजर आए। इस ऐतिहासिक स्वागत और विदाई समारोह में शहर के कई गणमान्य जनप्रतिनिधि भी देर रात तक कटरा बाजार में मौजूद रहे। इस पावन अवसर पर शहर की कैटरिंग एसोसिएशन की ओर से एक बड़ा सेवा कार्य करते हुए कटरा बाजार में हजारों श्रद्धालुओं के लिए महाप्रसादी का विशाल वितरण किया गया। आयोजकों के मुताबिक, इस महाप्रसादी का लाभ तीस हजार से अधिक भक्तों ने प्राप्त किया और देर रात तक यह सिलसिला अनवरत चलता रहा।

चक्राघाट पर संपन्न हुआ विसर्जन का अनुष्ठान

हजारों श्रद्धालुओं के हुजूम, पारंपरिक जयकारों और आतिशबाजी के बीच यह भव्य चल समारोह देर रात शहर के प्रसिद्ध चक्राघाट पर पहुंचा। यहाँ विधि-विधान और पूर्ण धार्मिक अनुष्ठान के साथ मां की प्रतिमा का विसर्जन किया गया। इस प्रकार सागर में सदियों पुरानी परंपरा और आधुनिक आस्था का यह महापर्व प्रशासनिक सुरक्षा व्यवस्था और अपार जनसमूह के बीच सकुशल संपन्न हुआ।