सागर: चीता मित्र और 'बाघिनी दीदी' दे रहे वन्यजीवों के व्यवहार का पाठ, टाइगर रिजर्व से सटे गांवों में जागरूकता अभियान शुरू
9 October 2026 • 09:13 am

सागर के वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में बाघ और तेंदुए के बाद अब चीतों की भी एंट्री हो गई है। बीते 7 अक्टूबर को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नौरादेही रेंज में बनाए गए विशेष बाड़े में दो चीते छोड़े थे। इसके बाद से टाइगर रिजर्व से सटे गांवों में वन विभाग ने ग्रामीणों के बीच एक विशेष जागरूकता अभियान शुरू किया है। गांवों के युवक-युवतियों का चयन कर उन्हें 'चीता मित्र' और 'बाघिनी दीदी' बनाया गया है, जिन्हें वन्यजीवों के व्यवहार और ग्रामीणों की सुरक्षा की ट्रेनिंग दी जा रही है।
गांव-गांव पहुंच रहे चीता मित्र
वन विभाग द्वारा इन युवाओं को बाघ, तेंदुआ, चीता और अन्य वन्यजीवों के व्यवहार की विशेष ट्रेनिंग दी गई है। चीता मित्र धर्मेंद्र लोधी ने बताया कि ट्रेनिंग के बाद अब वे गांव-गांव जाकर ग्रामीणों को जागरूक कर रहे हैं। ग्रामीणों को समझाया जा रहा है कि चीता सामान्य तौर पर इंसानों के लिए खतरा नहीं होता। यदि कोई चीता या अन्य वन्यजीव जंगल से निकलकर आबादी क्षेत्र में आ जाए, तो उसके पास जाने या उसे नुकसान पहुंचाने के बजाय तुरंत वन विभाग को सूचित करें।

महिलाओं को जागरूक कर रहीं 'बाघिनी दीदी'
चीता मित्रों के साथ-साथ 'बाघिनी दीदी' के रूप में चयनित महिलाएं खासकर गांव की महिलाओं और बच्चों को जागरूक कर रही हैं। वे ग्रामीणों को वन्यजीवों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने और जंगल की सुरक्षा में वन विभाग का सहयोग करने के लिए प्रेरित कर रही हैं। वनकर्मी मो. जाहिद खान ने बताया कि इन स्वयंसेवकों को लगातार ट्रेनिंग दी जा रही है ताकि वे ग्रामीणों और वन्यजीवों के बीच सेतु का काम कर सकें और भीड़ को नियंत्रित करने में मदद कर सकें।
मध्य प्रदेश में चीतों का तीसरा नया ठिकाना
वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में चीतों के आने के साथ ही यह मध्य प्रदेश में चीतों का तीसरा ठिकाना बन गया है। इससे पहले कूनो नेशनल पार्क और गांधी सागर अभयारण्य में चीते मौजूद हैं। टाइगर रिजर्व के नौरादेही रेंज में चीतों के अनुकूलन और निगरानी के लिए करीब 439 हेक्टेयर क्षेत्र में विशेष व्यवस्थाएं
की गई हैं।

