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सागर• about 1 month ago

कटरा जैन मंदिर में संत समागम बना ऐतिहासिक क्षण, आचार्य श्री विभव सागर महाराज और रावतपुरा सरकार का हुआ आत्मीय मिलन

21 September 2026 • 05:58 pm

सागर। कटरा स्थित श्री गौराबाई दिगंबर जैन मंदिर में सोमवार को उस समय ऐतिहासिक और भावपूर्ण दृश्य देखने को मिला, जब चातुर्मासरत आचार्य श्री 108 विभव सागर जी महाराज के दर्शन के लिए संत श्री रविशंकर जी महाराज ‘रावतपुरा सरकार’ पहुंचे। उनके आगमन के साथ ही पूरा पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा और उपस्थित श्रद्धालुओं ने दोनों संतों के आत्मीय मिलन का साक्षी बनकर हर्ष व्यक्त किया।

संत श्री रावतपुरा सरकार के मंदिर पहुंचने पर आचार्य श्री विभव सागर जी महाराज ने उनका आत्मीय स्वागत किया। विशेष रूप से आचार्य श्री ने स्वयं उनका हाथ पकड़कर मंदिर परिसर में विराजमान जिन प्रतिमाओं एवं धार्मिक स्थलों के दर्शन कराए। इस दौरान दोनों संत एक-दूसरे की सरलता, सहजता और साधना की प्रशंसा करते रहे। यह दृश्य उपस्थित श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण और भाव-विभोर करने वाला रहा।

धर्मसभा को संबोधित करते हुए संत श्री रविशंकर जी महाराज ने जैन धर्म के दशलक्षण पर्व, जैन साधुओं की कठिन चर्या और तपस्या के प्रति अपने भाव व्यक्त किए। उन्होंने आचार्य गुरुवर विद्यासागर जी महाराज के प्रति भी अपनी श्रद्धा प्रकट की तथा जैन संत परंपरा की त्यागमयी साधना की सराहना की। उन्होंने श्री सम्मेद शिखरजी की कई बार वंदना करने के अपने अनुभवों का भी उल्लेख किया।

संत श्री रावतपुरा सरकार ने आचार्य श्री विभव सागर जी महाराज के तप, त्याग और साधना के प्रति गहरी श्रद्धा व्यक्त करते हुए उन्हें महान संत बताया। वहीं आचार्य श्री विभव सागर जी महाराज ने भी संत श्री रविशंकर जी महाराज को अत्यंत सरल, सहज और सच्चा संत बताते हुए उनके आध्यात्मिक कार्यों की प्रशंसा की।

इस अवसर पर आचार्य श्री विभव सागर जी महाराज द्वारा संत श्री रविशंकर जी महाराज को विभिन्न धार्मिक शास्त्र भेंट किए गए। सकल जैन समाज की ओर से भी रावतपुरा सरकार का आत्मीय स्वागत एवं अभिनंदन किया गया। उल्लेखनीय है कि संत श्री रविशंकर जी महाराज रावतपुरा सरकार ने इस वर्ष पहली बार सागर में चातुर्मास किया है।

धर्मसभा में आचार्य श्री विभव सागर जी महाराज ने दशलक्षण महापर्व के अंतर्गत क्षमा धर्म और संयम धर्म के महत्व पर विशेष उपदेश देते हुए कहा कि मनुष्य के जीवन में क्षमा, संयम और विनम्रता का विशेष महत्व है। धर्म केवल आचरण और पूजा तक सीमित नहीं, बल्कि उसे अपने व्यवहार और जीवन में उतारना आवश्यक है।

विधायक शैलेंद्र जैन जी ने संत समागम को धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत प्रेरणादायी अवसर बताते हुए दोनों संतों के प्रति श्रद्धा व्यक्त की।

पूर्व विधायक सुनील जैन जी ने दोनों संतों के आत्मीय मिलन को सामाजिक समरसता, सद्भाव और आध्यात्मिक प्रेरणा का अद्भुत उदाहरण बताया।

इस अवसर पर विधायक शैलेंद्र जैन, पूर्व विधायक सुनील जैन, श्रीमती अनुश्री जैन, श्रीमती निधि जैन, संतोष जैन घड़ी, मनोज जैन, अशोक पडरुआ, अशोक फुसकेले, दिलीप रंधेलिया, मनोज बंघेला सहित बड़ी संख्या में जैन समाज की महिलाएं, समाज के प्रबुद्धजन एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।

दो संतों के इस आत्मीय मिलन ने कटरा जैन मंदिर के धार्मिक वातावरण को और भी विशेष बना दिया। श्रद्धालुओं ने इसे सागर के धार्मिक इतिहास का स्मरणीय संत समागम बताया।