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मध्यप्रदेश • 7 days ago Breaking

भोपाल: जबलपुर-इंदौर इकोनॉमिक कॉरिडोर के लिए बनेगी नई कंपनी, सरकार देगी 100 करोड़; 1 लाख करोड़ निवेश का लक्ष्य

15 October 2026 • 08:21 am

मध्य प्रदेश में औद्योगिक विकास को रफ्तार देने के लिए मोहन कैबिनेट ने 'जबलपुर-इंदौर इकोनॉमिक कॉरिडोर' के एकीकृत विकास के लिए एक नई कंपनी के गठन को मंजूरी दे दी है। यह 'जबलपुर-इंदौर इकोनॉमिक कॉरिडोर डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड' पूरी तरह से राज्य सरकार के स्वामित्व में काम करेगी। राज्य सरकार इस कंपनी को शुरुआती अंश पूंजी के रूप में 100 करोड़ रुपए देगी। इसका मुख्य उद्देश्य कॉरिडोर में उद्योगों के लिए नियोजित इंडस्ट्रियल हब विकसित करना, भारी निवेश आकर्षित करना और रोजगार के नए अवसर पैदा करना है।

मार्च 2028 तक 1 लाख करोड़ के निवेश का लक्ष्य

कैबिनेट में दिए गए प्रेजेंटेशन के मुताबिक, जबलपुर, भोपाल और इंदौर को जोड़ने वाले इस कॉरिडोर के पहले चरण में 10 हजार एकड़ क्षेत्र में 3 से 5 प्राथमिक औद्योगिक हब विकसित किए जाएंगे। सरकार ने मार्च 2028 तक 1 लाख करोड़ रुपए से अधिक का निवेश आकर्षित करने का लक्ष्य रखा है, जिससे 1 लाख प्रत्यक्ष और 2 लाख से अधिक अप्रत्यक्ष रोजगार मिलने की उम्मीद है। अगले तीन सालों में इसे बढ़ाकर 3 लाख करोड़ के निवेश और 6 लाख रोजगार तक ले जाने की योजना है।

'प्लग एंड प्ले' मॉडल पर बनेंगे इंडस्ट्रियल हब

ये औद्योगिक हब 'प्लग एंड प्ले' (Plug and Play) मॉडल पर विकसित किए जाएंगे, जहां उद्योग शुरू करने के लिए जमीन, बिजली, पानी, सड़क और डिजिटल कनेक्टिविटी जैसी सभी बुनियादी सुविधाएं एक ही जगह मिलेंगी। इसके साथ ही श्रमिकों के लिए आवास, अस्पताल, स्कूल और कौशल विकास केंद्र भी बनाए जाएंगे, जिससे यह एक इंडस्ट्रियल टाउनशिप का रूप ले लेगा। नई कंपनी का काम उद्योगों के लिए सिर्फ जमीन और सुविधाएं जुटाना होगा, जबकि सड़क निर्माण का काम संबंधित एजेंसियां ही करेंगी।

7 जिलों को मिलेगा सीधा फायदा, 30 दिन में बनेगी कंपनी

इस बड़ी परियोजना से प्रदेश के 7 जिलों- जबलपुर, नरसिंहपुर, रायसेन, भोपाल, सीहोर, देवास और इंदौर में औद्योगिक गतिविधियों को जबर्दस्त बढ़ावा मिलेगा। यहां पर्यटन, मैन्युफैक्चरिंग, एयरोस्पेस, फूड प्रोसेसिंग और आईटी जैसे सेक्टर्स विकसित किए जाएंगे। सरकार ने समयसीमा भी तय कर दी है; अगले 30 दिन में कंपनी का गठन कर लिया जाएगा और छह माह में पूरे कॉरिडोर की जीआईएस (GIS) मैपिंग और लैंड बैंक तैयार कर लिया जाएगा।

MPIDC से अलग होगा काम, सरकारी जमीन को प्राथमिकता

यह नई कंपनी मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम (MPIDC) से अलग केवल इन्ही 7 जिलों पर केंद्रित रहेगी, जबकि MPIDC पूरे प्रदेश का काम देखती रहेगी। कॉरिडोर के लिए सबसे पहले शासकीय भूमि को प्राथमिकता दी जाएगी। जरूरत पड़ने पर निजी भूमि मालिकों की सहमति या कानून के अनुसार अधिग्रहण कर उचित मुआवजा और पुनर्वास का लाभ दिया जाएगा।