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मध्यप्रदेश • 11 days ago Breaking

मालथौन: 200 से ज्यादा सरकारी स्कूलों में सफाईकर्मियों का भारी टोटा, आखिर कैसे स्वच्छ रहेंगे नौनिहाल?

11 October 2026 • 06:47 pm

देश में स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए सरकारें करोड़ों रुपये खर्च कर रही हैं और कई अभियान चलाए जा रहे हैं, लेकिन सागर जिले के मालथौन ब्लॉक के सरकारी स्कूलों में नौनिहालों को स्वच्छ वातावरण देने की व्यवस्था खुद बीमार है। ब्लॉक में प्राथमिक से लेकर हायर सेकेंडरी स्तर तक कुल 231 सरकारी स्कूल संचालित हैं, जिनमें से अधिकांश में नियमित सफाईकर्मियों की कोई व्यवस्था नहीं है। हालत यह है कि कहीं शिक्षक निजी सफाईकर्मी बुलाने को मजबूर हैं, तो कहीं पंचायत या नगर परिषद के भरोसे सफाई कराई जा रही है।

कहीं सिर्फ तीन कर्मचारी, तो कहीं एक भी नहीं

मालथौन ब्लॉक में 144 प्राथमिक, 61 माध्यमिक, 13 हाई स्कूल और 13 हायर सेकेंडरी स्कूल हैं। संकुल केंद्र रजवांस के अंतर्गत आने वाले 1 हायर सेकेंडरी और 6 हाई स्कूलों में कुल तीन सफाईकर्मी ही उपलब्ध हैं (हायर सेकेंडरी स्कूल रजवांस में 2 और हाई स्कूल पाली में 1)। वहीं नाउढ़ाना, बीजरी, सागौनी, उजनेट और ललोई के हाई स्कूलों में एक भी सफाईकर्मी नहीं है। संकुल केंद्र परसोन का हाल और भी गंभीर है; यहां परसोन, रोंडा, दुगाहा कलां, खिरिया, लोगर और रामछायारी के स्कूलों में एक भी सफाईकर्मी उपलब्ध न होने की बात सामने आई है।

शौचालय से लेकर पेयजल स्थलों की सफाई पर उठे सवाल

नियमित सफाईकर्मी न होने से कक्षाओं, शौचालयों, पेयजल स्थलों, पानी की टंकियों और पूरे परिसर की सफाई पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। सवाल यह है कि क्या शिक्षकों को पढ़ाई के साथ सफाई की व्यवस्था भी संभालनी पड़ती है या बच्चों से सफाई कराई जाती है? स्वच्छ विद्यालय का उद्देश्य केवल कक्षाओं को साफ रखना नहीं, बल्कि बच्चों को स्वच्छ शौचालय और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना भी है।

जिम्मेदार अधिकारियों ने भी मानी सफाईकर्मियों की कमी

इस संबंध में मालथौन के ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (BEO) हम्मीर सिंह लोधी का कहना है कि अधिकांश स्कूलों में सफाईकर्मियों की व्यवस्था नहीं है। भर्ती आउटसोर्स के माध्यम से होती है और डीपीआई से पद स्वीकृत होने पर ही नियुक्ति प्रक्रिया आगे बढ़ती है। उन्होंने माना कि शिक्षक अपने स्तर पर, पंचायत या नगर परिषद की मदद से सफाई करवाते हैं। वहीं, जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) अरविंद जैन ने भी स्वीकार किया कि सफाईकर्मियों की संख्या कम है, हालांकि उनका दावा है कि एक-दो कर्मचारी सभी जगह उपलब्ध हैं।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब विभाग स्वयं कमी स्वीकार कर रहा है, तो उन स्कूलों में जहां एक भी कर्मचारी नहीं है, वहां नियमित सफाई कैसे सुनिश्चित की जा रही है और यह व्यवस्था आखिर

कब सुधरेगी?