मध्यप्रदेश: सिंधिया और कमलनाथ के 'ईगो' ने गिराई थी 2020 में कांग्रेस सरकार, दिग्विजय सिंह का बड़ा खुलासा
12 October 2026 • 07:17 am

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने वर्ष 2020 में कमलनाथ सरकार के गिरने को लेकर एक बड़ा खुलासा किया है। हाल ही में एक विशेष बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि 15 महीने पुरानी कांग्रेस सरकार किसी बाहरी दबाव से नहीं, बल्कि तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया के आपसी 'ईगो' (अहंकार) और गलतफहमियों के टकराव के कारण गिरी थी।
सिंधिया की शर्तें और कमलनाथ का इनकार
दिग्विजय सिंह के अनुसार, 2018 में सत्ता में आने के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया खुद मुख्यमंत्री बनना चाहते थे। बाद में जब कमलनाथ ने उन्हें मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) का अध्यक्ष बनने का विकल्प दिया, तो सिंधिया ने उसे भी ठुकरा दिया। सिंधिया चाहते थे कि उनके समर्थक तुलसी सिलावट को पीसीसी चीफ और गोविंद सिंह राजपूत को उपमुख्यमंत्री बनाया जाए। कमलनाथ इसके लिए कतई तैयार नहीं हुए, जिसके बाद दोनों नेताओं के बीच तनाव बहुत ज्यादा बढ़ गया।
बंगला और तबादलों को लेकर भी हुई खींचतान
विवाद सिर्फ पदों तक ही सीमित नहीं था। लुटियंस दिल्ली में 23 सफदरजंग रोड का सरकारी बंगला रिटेन करने की कोशिश और ग्वालियर-चंबल संभाग में कलेक्टर-एसपी के तबादलों को लेकर भी सिंधिया ने कमलनाथ पर अपनी बात मनवाने का दबाव बनाया था, लेकिन कमलनाथ ने उनकी एक नहीं सुनी। अंततः इसी खींचतान के चलते कांग्रेस की सरकार गिर गई।
सनातन धर्म और बीजेपी पर साधा निशाना
अपनी 'सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा' को लेकर दिग्विजय सिंह ने कहा कि सनातन धर्म हजारों साल पुराना है, जबकि आरएसएस और बीजेपी कल की पैदावार हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष से नहीं, बल्कि भाजपा की विभाजनकारी विचारधारा से है, जो देश के सांप्रदायिक सौहार्द्र और संविधान को खत्म कर रही है। युवाओं से जुड़ने के सवाल पर उन्होंने सिटीजंस फॉर जस्टिस एंड पीस (CJP) जैसे संगठनों और युवाओं की राजनीति में भागीदारी की जमकर
सराहना की।

