जबलपुर: बिना रजिस्ट्रेशन चल रहा था अस्पताल, 23 तरह की एक्सपायरी दवाएं मिलीं; युवक की मौत के बाद हुआ सील
14 October 2026 • 04:13 am

जबलपुर में बेलखेडू के पास स्थित 'अधूरी अस्पताल' में जांच के दौरान एक बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। मंगलवार शाम ड्रग इंस्पेक्टर, पुलिस और ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (बीएमओ) की मौजूदगी में सील अस्पताल को खुलवाकर सघन जांच की गई। करीब एक घंटे चली इस जांच में 23 प्रकार की एलोपैथिक दवाएं मिलीं, जिनमें बड़ी मात्रा में एक्सपायरी दवाएं भी शामिल थीं। टीम ने मौके से करीब 12 हजार रुपए की दवाएं जब्त की हैं।
बिना डिग्री और रजिस्ट्रेशन के चल रहा था अस्पताल
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इस अस्पताल का कोई रजिस्ट्रेशन ही नहीं था। अधिकारियों के मुताबिक, अस्पताल संचालिका सरिता साहू के पास एलोपैथिक चिकित्सा की कोई मान्य डिग्री भी नहीं थी। आरोप है कि वह महज बंगाल से प्राप्त एक डिप्लोमा के आधार पर लंबे समय से अस्पताल चलाकर मरीजों का एलोपैथिक दवाओं से इलाज कर रही थी।

युवक की मौत के बाद हुआ था सील
गौरतलब है कि तीन दिन पहले 15 वर्षीय किशोर शेखर चौधरी की मौत के बाद जिला प्रशासन ने इस अस्पताल को सील कर दिया था। मंगलवार को जांच के दौरान यहां से बच्चों और गर्भवती महिलाओं के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाएं भी मिली हैं। पुलिस युवक की मौत के मामले की जांच पहले से कर रही है।
पैर दर्द का इलाज कराने गया था शेखर, ड्रिप चढ़ने के बाद हुई मौत
बेलखेडू के भट्ठा मोहल्ला निवासी 15 वर्षीय शेखर चौधरी को 2 अक्टूबर को पैर में तेज दर्द हुआ था, जिसके बाद परिजन उसे इसी अस्पताल लेकर पहुंचे थे। इलाज के बाद घर लौटने पर उसके हाथ-पैरों में तेज जलन होने लगी। परिजन उसे दोबारा अस्पताल ले गए, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। मृतक के परिजन समीर चौधरी की शिकायत पर पुलिस ने जांच शुरू की, जिसमें पता चला कि संचालिका सरिता साहू के कहने पर कंपाउंडर सतीश साहू ने शेखर को इंजेक्शन लगाए थे और अगले दिन ग्लूकोज की ड्रिप चढ़ाई गई थी। परिजनों के मुताबिक ड्रिप चढ़ने के करीब आधे घंटे बाद ही शेखर की मौत हो गई थी।
ड्रिप में मिलाए गए इंजेक्शन के एक्सपायरी होने की आशंका
ड्रग इंस्पेक्टर प्रतीक पटेल, बीएमओ डॉ. औषधि मिश्रा और चौकी प्रभारी अमित मिश्रा की टीम ने अस्पताल में दवाओं की जांच की। जांच के दौरान यह आशंका भी सामने आई है कि शेखर को चढ़ाई गई ड्रिप में मिलाए गए इंजेक्शन एक्सपायरी हो सकते हैं। हालांकि, युवक की मौत का वास्तविक कारण क्या था और उसमें दवाओं की क्या भूमिका थी, यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
जांच के दौरान गायब रही संचालिका
अधिकारियों के मुताबिक, बिना रजिस्ट्रेशन और बिना डिग्री के यह पूरा गोरखधंधा चल रहा था। जांच टीम ने अस्पताल संचालिका सरिता साहू को कई बार मौके पर बुलाया, लेकिन वह उपस्थित नहीं हुई। फिलहाल पुलिस और संबंधित विभाग युवक की मौत, एक्सपायरी दवाओं और अस्पताल के अवैध संचालन से जुड़े सभी पहलुओं की गहन
जांच कर रहे हैं।

