सागर पुलिस ने किया अंतर्राज्यीय मादक पदार्थ तस्करी गिरोह का भंडाफोड़: मध्य प्रदेश-राजस्थान सीमा के घने जंगलों में हुई थी 30 हजार में 30 ग्राम स्मैक की डील, दोपहिया वाहन गिरवी रखकर नशे की खेप
21 October 2026 • 06:35 am

मध्य प्रदेश और राजस्थान की सीमा पर दोपहिया वाहनों के जरिए मादक पदार्थ (स्मैक) की तस्करी करने वाले एक बड़े और शातिर अंतर्राज्यीय गिरोह का सागर जिले की देवरी पुलिस ने पर्दाफाश किया है। तस्करी के इस पूरे जाल का काम करने का तरीका बेहद चौंकाने वाला था, जहां गिरोह के मुख्य सरगना खुद नशे की लत में डूबे युवाओं को ही अपना मोहरा और आपूर्तिकर्ता बनाकर इस्तेमाल कर रहे थे। आलम यह था कि नशे की पूर्ति और तस्करी के लिए इन युवकों ने अपने खुद के दोपहिया वाहन तक गिरवी रखकर पैसों का इंतजाम किया था। पुलिस ने इस मामले में घेराबंदी करते हुए अब तक तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज दिया है, जबकि गिरोह के मुख्य सरगना समेत दो अन्य फरार आरोपियों की सरगर्मी से तलाश की जा रही है।

पेट्रोल पंप के पास हिस्सेदारी बांटते समय पुलिस ने मारा छापा, 30 ग्राम स्मैक जब्त
सागर जिले के देवरी थाना क्षेत्र में पिछले कुछ समय से लगातार अवैध रूप से स्मैक की बिक्री और आपूर्ति किए जाने की शिकायतें पुलिस को मिल रही थीं। इसी कड़ी में चार अक्टूबर को मुखबिर से मिली एक सटीक सूचना के आधार पर देवरी पुलिस की टीम ने रहली मार्ग पर स्थित रजौला पेट्रोल पंप के पास अचानक घेराबंदी कर छापा मारा। मौके पर संदिग्ध हालत में खड़े दिनेश साहू और छोटू उर्फ तिलक यादव को पुलिस ने हिरासत में लेकर जब उनकी तलाशी ली, तो दोनों के पास से पंद्रह-पंद्रह ग्राम (कुल 30 ग्राम) अवैध स्मैक बरामद हुई। यह कार्रवाई ठीक उस वक्त हुई जब देवरी लौटने के बाद दिनेश ने छोटू को उसके हिस्से का पंद्रह ग्राम मादक पदार्थ का पैकेट सौंपा था और वे दोनों बाकी का नशा देवरी के छीर निवासी राकेश उर्फ भजिया लोधी को देने जाने की फिराक में थे। पुलिस ने तुरंत दोनों के खिलाफ स्वापक औषधि और मनःप्रभावी पदार्थ अधिनियम (एनडीपीएस एक्ट) के तहत प्रकरण दर्ज कर सख्त पूछताछ शुरू की।
दोपहिया वाहन गिरवी रखकर जुटाई रकम, राजस्थान के जंगलों में हुई थी डील
देवरी थाना प्रभारी कपिल लाक्षाकार के मुताबिक, पकड़े गए आरोपी दिनेश साहू और छोटू यादव खुद भी स्मैक का नशा करने के आदी हैं। पूछताछ में यह बड़ा खुलासा हुआ कि वे अपने नशे की लत को पूरा करने के साथ-साथ राकेश लोधी के लिए भी राजस्थान से नशे की खेप लाने गए थे। इस अवैध सौदे के लिए पैसों का इंतजाम करने का तरीका भी बेहद हैरान करने वाला था; नशा खरीदने के लिए राकेश लोधी ने दस हजार रुपये नगद दिए थे, जबकि छोटू ने अपनी मोटरसाइकिल गिरवी रखकर दस हजार रुपये और दिनेश ने अपनी मोटरसाइकिल गिरवी रखकर पंद्रह हजार रुपये का जुगाड़ किया था।
पैसे इकट्ठा होने के बाद दो अक्टूबर को आरोपी दिनेश बस में सवार होकर राजस्थान के झालावाड़ पहुंचा, जहां उसकी मुलाकात स्थानीय तस्कर सुरेश और उमेश से हुई। ये दोनों तस्कर दिनेश को सीमा क्षेत्र से अपनी मोटरसाइकिल पर बैठाकर झालावाड़ के घाटोली-दुर्जनपुर स्थित बेहद सुनसान जंगलों के भीतर ले गए। वहीं घने जंगल में उमेश ने तीस हजार रुपये के बदले तीस ग्राम स्मैक की खेप दिनेश को सौंपी और फिर दोनों ने उसे वापस सीमा तक छोड़ा, जहां से वह बस पकड़कर वापस सागर के देवरी लौट आया। जांच में यह भी पता चला है कि आरोपी इस स्मैक की एक-एक ग्राम की छोटी-छोटी पुड़िया बनाकर स्थानीय स्तर पर डेढ़ सौ से दो सौ रुपये में बेचते थे।
सागर से झालावाड़ तक तस्करी के तीन प्रमुख रास्ते और राजस्थान में दबिश
तस्करों द्वारा सागर के देवरी से राजस्थान के झालावाड़ तक पहुंचने के लिए मुख्य रूप से तीन अलग-अलग मार्गों का इस्तेमाल किया जाता रहा है। इसमें पहला मार्ग देवरी से राष्ट्रीय राजमार्ग चवालीस होते हुए बीना, कुरवाई, बीनागंज, चाचौड़ा और अकलेरा से होकर झालावाड़ पहुंचता है। दूसरा मार्ग देवरी से सागर, विदिशा, भोपाल, ब्यावरा, खिलचीपुर और अकलेरा होते हुए जाता है, जबकि तीसरा रास्ता देवरी से सागर, राहतगढ़, सिरोंज, आरोन, राघौगढ़ और गुना होते हुए सीधे झालावाड़ से जुड़ता है।
पकड़े गए दोनों आरोपियों से मिले अहम सुरागों के आधार पर देवरी पुलिस की एक विशेष टीम ने राजस्थान के झालावाड़ में दबिश दी और वहां से नशे की आपूर्ति करने वाले आरोपी उमेश को भी दबोच लिया। मामले की जानकारी देते हुए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नरेंद्र सोलंकी ने बताया कि इस तस्करी तंत्र में शामिल तीन आरोपियों—दिनेश साहू, छोटू उर्फ तिलक यादव और उमेश को गिरफ्तार किया जा चुका है। वहीं इस पूरे गिरोह का मुख्य सरगना सुरेश (निवासी राजस्थान) और देवरी का राकेश उर्फ भजिया लोधी फिलहाल फरार हैं, जिनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही है।

