नल-जल योजना में 3,200 करोड़ रुपये के भारी खर्च पर उठे गंभीर सवाल; सतना और मैहर में धरातल पर काम और बिलिंग के मिलान की उठी मांग
18 October 2026 • 08:22 am

मध्य प्रदेश में करोड़ों रुपये की लागत से चल रही नल-जल योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर सियासी पारा एक बार फिर चढ़ गया है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक और प्रदेश प्रवक्ता रितेश त्रिपाठी ने सतना और मैहर समेत विभिन्न जिलों में चल रहे प्रोजेक्ट्स में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और वित्तीय गड़बड़ियों के आरोप लगाए हैं। कांग्रेस नेताओं ने मांग की है कि इन تمام परियोजनाओं की एक स्वतंत्र और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए ताकि जनता के पैसों के इस्तेमाल का सच सामने आ सके।
सतना-मैहर में 3,200 करोड़ के प्रोजेक्ट और धरातल के काम में भारी अंतर के दावे
कांग्रेस नेताओं ने खुलासा किया है कि सतना और मैहर क्षेत्र में लगभग 3,200 करोड़ रुपये की नल-जल योजनाओं पर खर्च का दावा किया जा रहा है, जबकि जमीन पर महज 500 करोड़ रुपये के आसपास ही वास्तविक काम नजर आता है। मैहर की बाणसागर समूह जलप्रदाय योजना, जिसकी शुरुआत वर्ष 2018 में लगभग 1,200 करोड़ रुपये के बजट से हुई थी, उस पर भी सवाल खड़े किए गए हैं। इस योजना के तहत करीब 980 पंचायतों तक पानी पहुंचाने का लक्ष्य था, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि कागजी दावों के विपरीत केवल 30 से 40 गांवों में ही पानी पहुंच पा रहा है। इसी प्रकार सतना में एलएंडटी से जुड़ी लगभग 2,000 करोड़ रुपये की योजना में भी तय समयसीमा यानी मार्च 2025 के बाद भी काम पूरा न होने पर विलंबी दंड और नियमों के पालन को लेकर पारदर्शिता बरतने को कहा गया है।
पाइपलाइन क्षति, रेस्टोरेशन और सामग्री की गुणवत्ता पर भी संदेह
प्रेस वार्ता के दौरान यह भी आरोप लगाया गया कि मदनी, पिंडरा, जखौरा और वीरपुर समेत कई गांवों में सड़क मरम्मत और रेस्टोरेशन के नाम पर प्रति पंचायत दो से तीन करोड़ रुपये तक की हेराफेरी की गई है। इसके अलावा, एलएंडटी द्वारा दो सौ करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होने तथा बगहा से मझगवां क्षेत्र में लगभग 65 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन के टूटने के मामलों की भी तकनीकी जांच कराने की मांग रखी गई है। पाइपों के जोड़ों में इस्तेमाल होने वाली ग्रीस और अन्य सामग्रियों की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए गए हैं, ताकि आम जनता के स्वास्थ्य के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ न हो। रामनगर के बड़ा इटमा गांव में पाइप चोरी से जुड़ी एफआईआर और पापड़ा मेगा टैंक से संबंधित भूमि अभिलेखों की भी निष्पक्ष समीक्षा किए जाने पर जोर दिया गया है।
कैग रिपोर्ट और अधिकारियों की आपत्तियों पर कार्रवाई की मांग
कांग्रेस नेताओं ने सरकार से कड़े सवाल पूछते हुए कहा कि कैग रिपोर्ट, वरिष्ठ अधिकारियों की आपत्तियों, और सीएम हेल्पलाइन पर दर्ज शिकायतों के साथ-साथ मंत्री प्रतिमा बागरी की कथित नोटशीट सामने आने के बावजूद अभी तक कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की गई है। पार्टी ने स्पष्ट किया है कि जिन गांवों में आज भी पीने का पानी नहीं पहुंच रहा है, वहां जल शुल्क वसूलने का कोई औचित्य नहीं बनता है। सरकार को पहले यह स्पष्ट करना चाहिए कि किन इलाकों में नियमित जलापूर्ति हो रही है। अंत में कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने इन सभी बिंदुओं पर निष्पक्ष जांच कराकर पारदर्शिता सुनिश्चित नहीं की, तो जनता के हक के लिए व्यापक स्तर पर आवाज उठाई जाएगी।

