शिकागो में मतदाता सूची से नाम हटाने के विरोध में प्रदर्शन, 50 से अधिक भारतीयों ने उठाई आवाज
21 October 2026 • 06:47 am

शिकागो। अमेरिका के शिकागो में मंगलवार को 50 से अधिक भारतीय प्रवासियों ने भारतीय वाणिज्य दूतावास के बाहर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने भारत में मतदाता सूची से कथित तौर पर अवैध तरीके से नाम हटाए जाने के विरोध में नारेबाजी की और इस मुद्दे पर पारदर्शिता की मांग उठाई।
प्रदर्शनकारियों ने ‘जय भीम’, ‘जय सावित्री’, ‘इंकलाब जिंदाबाद’ और ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’ जैसे नारे लगाए। उनका आरोप था कि मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने से लोगों के बुनियादी लोकतांत्रिक अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।
इस प्रदर्शन का आयोजन शिकागो में रहने वाले भारतीय प्रवासी समुदाय के सदस्यों ने स्वतंत्र रूप से किया। इसे इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल (IAMC), SACRED और हिंदूज़ फॉर ह्यूमन राइट्स (HfHR) का समर्थन मिला। प्रदर्शन में भारतीय प्रवासी समुदाय के सदस्यों, विद्यार्थियों, विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधियों और अन्य लोगों ने हिस्सा लिया।

मतदाता सूची में पारदर्शिता की मांग
प्रदर्शनकारियों ने निर्वाचन आयोग से मांग की कि गलत तरीके से हटाए गए मतदाताओं के नाम दोबारा जोड़े जाएं और मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया को पारदर्शी व जवाबदेह बनाया जाए। उनका कहना था कि इस तरह की कार्रवाई का असर गरीबों, प्रवासी मजदूरों और अल्पसंख्यक समुदायों पर अधिक पड़ सकता है।
भारतीय मूल के नागेश फार्मर ने कहा कि मतदाता सूची से नागरिकों के नाम हटाना केवल प्रशासनिक गलती का मामला नहीं है, बल्कि इससे लोकतांत्रिक अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने इस मुद्दे पर प्रवासी भारतीयों के चुप नहीं रहने की बात कही।
शिकागो में पढ़ाई कर रहे जबलपुर निवासी विशाल कुमार और संदीप कांबले ने भी लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मताधिकार से वंचित होने का असमान प्रभाव समाज के कमजोर वर्गों पर पड़ने की आशंका गंभीर चिंता का विषय है।
अमेरिकी जनप्रतिनिधियों से हस्तक्षेप की अपील
प्रदर्शनकारियों ने अमेरिका के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों से भारत में स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव से जुड़े मुद्दों पर ध्यान देने की अपील की। उन्होंने मतदाता सूची में नाम जोड़ने की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने और प्रत्येक पात्र नागरिक के मतदान के अधिकार की रक्षा सुनिश्चित करने की मांग की।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए जागरूकता और जवाबदेही जरूरी है। उन्होंने इस मुद्दे पर अपनी आवाज उठाते रहने की बात भी कही।

