दमोह: हाथों में रस्सी बांधकर कलेक्ट्रेट पहुंचे आदिवासी, 50 साल से काबिज जमीन निजी संस्था को देने का विरोध
12 October 2026 • 10:58 am

दमोह जिले के जबेरा ब्लॉक अंतर्गत कुसमी मानगढ़ गांव की आदिवासी महिलाएं सोमवार दोपहर हाथों में रस्सी बांधकर कलेक्ट्रेट पहुंचीं। कलेक्ट्रेट परिसर में नारेबाजी करते हुए उन्होंने कलेक्टर को एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें 50 एकड़ जमीन किसी एनजीओ को न देने की गुहार लगाई गई है।
50 सालों से काबिज हैं ग्रामीण
ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि वे पिछले 50 वर्षों से इस जमीन पर काबिज हैं। यहां उनके पक्के-कच्चे घर बने हुए हैं और करीब 50 परिवार इसी जमीन पर खेती कर अपना जीवन यापन कर रहे हैं। समय-समय पर वे प्रशासन को जुर्माने का भुगतान भी करते रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार अब यह जमीन 'जन कल्याण न्यास' नामक एक निजी संस्था को लीज पर दे रही है, जिससे उनके सामने बेघर होने का बड़ा संकट खड़ा हो गया है।

धोखे से हस्ताक्षर कराने का आरोप
ग्रामीणों ने पंचायत और स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि पंचायत द्वारा जमीन खाली कराने के संबंध में न तो कोई मुनादी कराई गई और न ही उन्हें कोई पूर्व जानकारी दी गई। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव के कोटवार ने यह अफवाह फैलाकर उनके हस्ताक्षर ले लिए कि गांव में एक बड़ा 'सीएम राइज स्कूल' बनना है। इसके बाद अचानक उन्हें जमीन खाली करने का फरमान सुना दिया गया, जिसके विरोध में वे आज कलेक्ट्रेट पहुंचने को मजबूर हुए हैं।
'जन कल्याण न्यास' के कार्यों की जांच की मांग
आदिवासियों के इस प्रदर्शन में जिला पंचायत सदस्य रजनी ठाकुर और कांग्रेस नेता नितिन मिश्रा भी महिलाओं के समर्थन में मौजूद रहे। नेता नितिन मिश्रा ने संबंधित 'जन कल्याण न्यास' के कार्यों की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि अगर यह जमीन खाली कराई गई तो ये 50 गरीब परिवार पूरी तरह से बेघर हो जाएंगे।

