तेंदूखेड़ा SDM कार्यालय में ‘ऑफलाइन’ का बड़ा खेल? अधिकारियों के बयानों में विरोधाभास, रिकॉर्ड दुरुस्ती के मामलों पर उठे गंभीर सवाल
दिनेश चौबे, दमोह
19 September 2026 • 07:09 pm

दमोह। तेंदूखेड़ा राजस्व विभाग में रिकॉर्ड दुरुस्ती (धारा 115) के मामलों को लेकर अधिकारियों के परस्पर विरोधी बयानों और आरसीएमएस पोर्टल पर दर्ज आंकड़ों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार एक ओर अधिकारी कार्यालय में सभी प्रकरण ऑनलाइन दर्ज होने की बात कह रहे हैं, वहीं विभाग के कुछ कर्मचारियों ने नाम न छापने की शर्त पर प्रकरणों को ऑफलाइन दर्ज किए जाने का दावा किया है।

रिकॉर्ड दुरुस्ती के आवेदनों की प्रक्रिया को लेकर एसडीएम सी.जी. गोस्वामी और तहसीलदार विवेक व्यास के बयान भी अलग-अलग सामने आए हैं। एसडीएम गोस्वामी के अनुसार रिकॉर्ड दुरुस्ती के मामले तहसीलदार के यहां दर्ज किए जाते हैं। दूसरी ओर तहसीलदार विवेक व्यास का कहना है कि धारा 115 के तहत रिकॉर्ड दुरुस्ती के आवेदन एसडीएम कोर्ट में ही दर्ज होते हैं। तहसीलदार ने यह भी कहा कि एसडीएम ने ऐसा क्यों कहा, इस संबंध में वे कुछ नहीं बता सकते। एक ही उपखंड के दो वरिष्ठ अधिकारियों के अलग-अलग बयानों के कारण प्रक्रिया और नियमों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो पा रही है।

रिपोर्ट में आरसीएमएस (RCMS) पोर्टल के आंकड़ों पर भी सवाल उठाए गए हैं। पोर्टल के मुताबिक पिछले तीन महीनों में तेंदूखेड़ा एसडीएम कार्यालय में लंबित प्रकरणों की संख्या केवल **चार** दिखाई दे रही है। इस संबंध में एसडीएम गोस्वामी का कहना है कि प्रकरणों की संख्या बेहद कम होने के कारण ऑनलाइन आंकड़े भी कम दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि कार्यालय में कोई भी प्रकरण न तो ऑफलाइन दर्ज किया जा रहा है और न ही ऑफलाइन निपटाया जा रहा है। उनके अनुसार जितने वास्तविक मामले हैं, वे पोर्टल पर दर्ज हैं।
हालांकि रिपोर्ट में विभाग के कुछ कर्मचारियों के हवाले से इसके विपरीत दावा किया गया है। नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर कर्मचारियों ने बताया कि रीडर का पद खाली होने और कंप्यूटर ऑपरेटर की कमी का हवाला देकर कुछ प्रकरणों को ऑफलाइन दर्ज किया जा रहा है। सूत्रों का आरोप है कि इन मामलों की पोर्टल पर एंट्री नहीं होने से वास्तविक आंकड़े ऑनलाइन रिकॉर्ड में दिखाई नहीं देते।

इस पूरे मामले में सवाल यह भी उठाया गया है कि यदि लंबे समय से कंप्यूटर ऑपरेटर की कमी है तो उसकी वैकल्पिक व्यवस्था करने के बजाय ऑफलाइन प्रक्रिया का सहारा क्यों लिया जा रहा है। बिना ऑनलाइन रिकॉर्ड के बैकडेट अथवा ऑफलाइन फाइलों पर काम किए जाने की आशंका पारदर्शिता को लेकर सवाल पैदा करती है। रिपोर्ट में यह भी पूछा गया है कि क्या ऑफलाइन व्यवस्था की आड़ में फाइलों को दबाने अथवा बिना सार्वजनिक ऑनलाइन रिकॉर्ड के मामलों की सुनवाई जैसी स्थिति तो नहीं बन रही है और इसका संबंध कीमती जमीनों से जुड़े मामलों से तो नहीं है। हालांकि इस संबंध में किसी गड़बड़ी या जमीनों की हेराफेरी की स्वतंत्र पुष्टि रिपोर्ट में नहीं की गई है।
मामला इसलिए भी संवेदनशील बताया गया है क्योंकि तेंदूखेड़ा क्षेत्र का बड़ा हिस्सा रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व से संबंधित विस्थापन और करोड़ों रुपये की भुगतान राशि से जुड़ा हुआ है। ऐसे में रिकॉर्ड दुरुस्ती एवं जमीन संबंधी मामलों में पारदर्शी प्रक्रिया और ऑनलाइन रिकॉर्ड को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
रिपोर्ट में मांग की गई है कि प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी तेंदूखेड़ा एसडीएम कार्यालय में रिकॉर्ड दुरुस्ती के मामलों, ऑनलाइन और ऑफलाइन रिकॉर्ड की स्थिति तथा आरसीएमएस पोर्टल पर उपलब्ध आंकड़ों की निष्पक्ष जांच कर स्थिति स्पष्ट करें, ताकि अधिकारियों के अलग-अलग बयानों और विभागीय स्तर पर लगाए जा रहे आरोपों की वास्त
विकता सामने आ सके।

